सेवा निवृत्ति के वर्षों बाद भी ग्रैचुटी का नहीं हो रहा भुगतान* *दर-दर भटकने को मजबूर कोयला खान कर्मी-कोतमा गोविंदा उपक्षेत्र का है मामला* *शीघ्र भुगतान हो =श्रीकांत शुक्ला*

*सेवा निवृत्ति के वर्षों बाद भी ग्रैचुटी का नहीं हो रहा भुगतान* 
*दर-दर भटकने को मजबूर कोयला खान कर्मी-कोतमा गोविंदा उपक्षेत्र का है मामला* 
*शीघ्र भुगतान हो =श्रीकांत शुक्ला*
संतोष चौरसिया
जमुना कोतमा क्षेत्र में ऐसे कई खान कर्मचारी है जो सेवानिवृत्ति के वर्षों बाद भी ग्रैचुटी की धनराशि को प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं।  कुछ ऐसे भी कर्मी हैं जिन्हे कई-कई महीने स्वयं की जमापूंजी सी एम्  पी ऍफ़ भी कहते में नहीं मिल पा रहा है।  कुछ का पेंशन कई महीनो बाद भी बैंक में नहीं जा रहा है।  सबसे बड़ी बिडंबना यह है कि नियमानुसार एक माह के अंदर कर्मी का सी एम् पी ऍफ़ , ग्रैचुटी और अर्जित अवकाश का नकदीकरण कर भुगतान कर दिया जाना चाहिए तथा पेंशन कि राशि बैंक में भेज दिया जाना चाहिए।  इसीलिए जब कोई कर्मचारी सेवा निवृत्ति होता है उसके छह माह पूर्व उसको नोटिस दिया जाता है ताकि वह आवश्यक और वांछित दस्तावेज अपनी इकाई में जमा कर सके और प्रबंधन द्वारा अग्रिम कार्यवाही शीघ्र हो सके। ग्रैचुटी के सम्बन्ध में नियम है कि यदि कोई विभागीय जांच, देयक या कंपनी कि कोई संपत्ति जो उसके नाम हो उसे जमा कर दे तभी ग्रैचुटी का भुगतान पूर्णतया किया जावेगा। इसीलिए कोई भी कर्मी सेवा निवृत्त होते ही अपना कंपनी आवास भी कंपनी को खाली कर लौटा देता है और आपने पैतृक निवास या अन्य गाँव-शहर में अपने निज निवास में रहने को सुदूर चला जाता है। समस्या तब उत्पन्न होती है कि जब वह ग्रैचुटी राशि कि भुगतान के सम्बन्ध में बार-बार क्षेत्र में आता है, तब उसका न रहने न खाने कि सुविधा मिल पाती एवं वह दर-दर कि ठोकर खाते हुए इस कार्यालय से उस कार्यालय , इस अधिकारी से उस अधिकारी के पास दो-चार दिन भटकते हुए वापस खाली हाँथ अपने सुदूर गाँव पुनः लौट जाता है। अधिकरियों द्वारा बार-बार यही कहा जाता है यह कागजात कम है या हमने फाइल बढ़ा दिया है या कुछ दिन बाद आना। प्रश्न यहाँ खड़ा होता है कि किसी कर्मचारी के सेवा निवृत्त होने के छह माह पूर्व से प्रबंधन क्या करता है।  क्या यह प्रबंधन की उदासीनता और कर्तव्य के प्रति लापरवाही नहीं है        
                           कोतमा गोविंदा उपक्षेत्र से सेवानिवृत्त हुए ऐसे 14 कर्मचारियों का मामला प्रकाश में आया है कि जो नवम्बर 2018  से लेकर दिसंबर 2020 तक के बीच सेव निवृत्त हुए और अभी तक उनको ग्रैचुटी कि राशि प्राप्त नहीं हुआ है। जिनमे  शाकिर बक्स (नवम्बर 2018 ) उदयचंद  (मार्च 2019 ) गया प्रसाद (फरवरी 2020 ) इक़बाल अली आगमदास, शोभनाथ,  सुंदरलाल शर्मा,  मगलू दास,  श्यामलाल,  ननका प्रसाद,  विनय कुमार सिंह, राधेश्याम , हरीश चंद्र,  गोपाल दास आदि इससे स्पस्ट है कि एक साथ इतने कर्मचारियों कि राशि आखिर क्यों लंबित है अर्थात प्रबंधन अपने कर्तव्य के प्रति टालमटोल का रवैया अपनाये हुए है।  जब इस मामले में इन भुक्तभोगी कर्मचारियों ने कोतमा मजदूर सभा (एच एम् इस ) के क्षेत्रीय अध्यक्ष श्री श्रीकांत शुक्ल  से अपनी व्यथा बताई तब श्री शुक्ला  ने उन्हें आश्वस्त किया कि कारण क्या है मैं प्रबंधन से पहले पूरी जानकारी प्राप्त करूँगा और यदि प्रबंधन कि लापरवाही इसमें कही भी मुझे समझ में आया तो जो भी अधिकारी दोषी होंगे  उनके विरुद्ध हर स्तर में शिकायत करूँगा और आवश्यक हुआ तब सी एम् डी कार्यालय में आप सभी को साथ ले जाकर तब तक धरना दूंगा जब तक आपका ग्रैचुटी कि राशि जो आपके खून-पसीने से अर्जित किया गया आपके खाते में नहीं आ जाता है

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