*यूनियनो को जेबीसीसीआई के संबंध में अलग अलग बयान देने से बचना चाहिए*- *हरिद्वार सिंह*
बीएमएस ने मांग किया था कि 1 जून के पहले मानकीकरण कमेटी की बैठक प्रबंधन बुलाए और इधर तीन यूनियन एचएमएस, एटक, सीटू ने मांग किया था कि जेबीसीसीआई की सीधे बैठक बुलाई जाए। इस परिस्थिति में एक यूनियन के नेता ने सूझ बूझ का परिचय देते हुए सभी यूनियन के नेताओं से बात किया और एक सहमति बनी कि जेबीसीसीआई की रूपरेखा तैयार करने के लिए प्रबंधन के साथ बैठक किया जाए और 30 तारीख को बैठक हुई। उपरोक्त बातें एटक एसईसीएल के महासचिव, एटक जेबीसीसीआई के वैकल्पिक सदस्य कामरेड हरिद्वार सिंह ने जानकारी देते हुए कहा। कामरेड सिंह ने बताया कि 30 मई की बैठक में तय हुआ है कि एक कॉमन चार्टर ऑफ़ डिमांड दिया जायेगा। 2 जून को चार्टर ऑफ़ डिमांड दिया जायेगा। ताकि जल्दी से जल्दी जेबीसीसीआई की बैठक हो सके। इसलिए जब एक कॉमन चार्टर ऑफ़ डिमांड देने की बात है तो फिर एक यूनियन के द्वारा मांग पत्र देना या ये कहना कि एक यूनियन के दबाव में जेबीसीसीआई का गठन हो रहा है, यह बिलकुल गलत है और इससे सभी यूनियन के साथियों को बचना चाहिए। सभी यूनियन एक होकर जब तक प्रबंधन पर दबाव नहीं बनाएंगे तब तक जेबीसीसीआई का फैसला नहीं होगा। और मुझे खुशी है कि चारों यूनियन के शीर्ष नेता एक हैं। इसीलिए नीचे लेवल में कोई बयान देकर भ्रम की स्थिति पैदा नहीं करनी चाहिए। प्रबंधन द्वारा चारो यूनियन से 15 जून के पहले जेबीसीसीआई सदस्यों के नाम मांगे गए हैं, जिसे यूनियनों के द्वारा दिया जायेगा। जून के महीने में पहली बैठक होने की संभावना है। एक बात और कि इस बार 9 निजी कम्पनियों को भी जेबीसीसीआई में आमंत्रित किया गया है, कितनी कंपनिया शामिल होती है यह तो वक्त बताएगा। लेकिन सभी को मालूम होना चाहिए कि निजी कंपनिया कभी भी नहीं चाहती है कि कोयला मजदूरों का वेतन बढ़े।
कामरेड हरिद्वार सिंह ने कहा कि हमें लड़ाई सरकार से लड़नी है, कोयला प्रबंधन से लड़नी है और निजी कम्पनियों से भी लड़नी है। ताकि हम कोयला मजदूरों का सही वेतन समझौता करा कर अच्छा वेतन व सुविधाएं दिला सकें। इस समय अलग अलग राग, अलग अलग सोच रखना उचित नहीं है। हो सकता है कि यदि कोयला प्रबंधन और सरकार ने हमारी बात नहीं मानी तो हम लोगों को मिलकर हड़ताल करना पड़े। इसलिए ये वक्त अलग अलग चलने का, अलग अलग सोचने का, या अलग अलग बयान देने का नहीं है, बल्कि एक होकर चट्टानी एकता कायम करने का हमको प्रयास करना चाहिए, एकता बनाए रखने के लिए हमें बयान देना चाहिए। इसीलिए मेरा सभी यूनियनों से विनम्र आग्रह है कि हमें कोई क्रेडिट लेने से बचना चाहिए। जब वेतन समझौता हो जायेगा तब क्रेडिट सभी यूनियन को जायेगा। आज के समय में कोई भी यूनियन अकेले सक्षम नहीं है कि अपने दम पर वेतन समझौता करा ले। ऐसे भी सरकार का रुख कोयला मजदूरों के खिलाफ है। इस कोरोना काल में हमारे लगभग 350 से 400 मजदूरों ने शहादत दी है हमें कोयला मजदूरों के शहादत को याद रखना है। कोयला मजदूरों ने इस कोरोना काल में अपनी जान जोखिम में डालकर देश हित का कार्य किया है इसीलिए निश्चित रूप से कोयला मजदूरों को बेहतर वेतन समझौता मिलना चाहिए, इसके लिए हम सभी को एक होकर चलना पड़ेगा।
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