जमुना कोतमा क्षेत्र का प्रबंधन राज्य प्रशासन पर कर रहा दोषारोपण
आमाडांड ओसीपी का उत्पादन बंद होने का मुख्य वजह खान प्रबंधन
जमुना कोतमा क्षेत्र का जीवन दायिनी खदान आज अपनी दुर्दशा के दौर से गुजर रहा है। यदि गंभीरता से तथ्यों पर विचार किया जाय तब स्पष्ट हो जाता है कि इस दुर्दशा का मुख्य कारण जमुना कोतमा क्षेत्र का प्रबंधन और उनकी सुस्त कार्यचरण वाली नीतियां है। आज प्रबंधन राज्य शासन को सहयोग नहीं किये जाने का प्रचार-प्रसार कर अपने को पाक साफ बता रहा है। जबकि वास्तविकता यह है कि प्रबंधन के अधिकारी अपना समय पास कर पदोन्नति और मनचाही जगह स्थानांतरण के चक्कर में कभी मन से काम किया ही नहीं। उनके दिमाग में बैठा है कि मुझे वेतन और सुविधा पूरा मिल ही रहा है, यहाँ न सही तो कही और स्थानांतरित हो जाऊंगा। आमाडांड ओसीपी खदान आज पूर्व महाप्रबंधक श्री चंद्रेश्वर सिंह और उपक्षेत्रीय प्रबंधक श्री ए के सिंह के त्याग संघर्ष और मन से काम करने के कारण खुला था। जिन्हे आज भी क्षेत्र के श्रमिक दिल से याद कर सम्मान करते है। खान का वर्तमान प्रबंधन ऐसा है कि खदान का पी -6 ठेकेदारी पैच ग्रामीणों द्वारा अपने हक़ और रोजगार के लिए बंद करवा दिए जिससे प्रबंधन ने विभागीय पैच चालू होने के बाद भी कंपनी के श्रमिकों का सन्डे एवं पी एच डी ड्यूटी बंद कर दिया और कहा कि जब पी -6 पैच चालू होगा तब सन्डे चालू होगा और खान के जे सी सी सदस्यों एवं महिला कर्मियों को ग्रामीणों के सामने खड़ाकर चालाकी से अपना बचाव करता है। इसी से साफ जाहिर होता है कि प्रबंधन विभागीय कर्मचारियों का उपयोग ग्रामीणों के विरुद्ध उकसाने और गवाह के तौर पर सामने ला रहा है सिर्फ सन्डे ड्यूटी चालू करने का लालच देकर। वर्तमान उपक्षेत्रीय प्रबंधक जुलाई 2021 से खान में पदस्थ है फिर इन्होने भू अर्जन नीति के तहत ग्रामीणों के रोजगार से सम्बंधित कार्य पर सुस्ती क्यों दिखाया और जब दिनांक 21 /10 /2022 को थाना रामनगर के पुलिस कर्मियों द्वारा खदान बंद करवाने वालों के विरुद्ध खान प्रबंधन द्वारा किये गए एफआईआर पर विवेचना करने पहुंचे, तब आनन्-फानन में खान जे सी सी कि बैठक बुला उन्हें पुलिस को गवाही देने का दबाव बनाया। मलाई खाये कोई डंडा खाये श्रमिक। जबकि मुख्य गवाह और साक्ष्य खान प्रबंधक,खान सुरक्षा अधिकारी,पी-6 पैच के प्रभारी, ठेकेदार, खान के सर्वे अधिकारी, सुरक्षा प्रहरी और क्षेत्रीय अधिकारी जो मौके पर तैनात रहते हैं, उन्हें बनाया जाना चाहिए।
इस प्रकरण में कोयला मजदूर सभा के क्षेत्रीय अध्यक्ष और कंपनी उपाध्यक्ष श्री श्रीकांत शुक्ल ने बताया कि खान के उपक्षेत्रीय प्रबंधक ही पी -6 पैच बंद होने के मुख्य जिम्मेवार हैं। उन्हें हिंदी भाषा का ज्ञान नहीं है तब ग्रामीणों से कैसे संवाद स्थापित कर तालमेल बना पाएंगे। ग्रामीण हिंदी में जब कोई आवेदन देते हैं तब इनको किसी और से पढ़वाना और समझना पड़ता है। पात्र को रोजगार दिलवाना तो दूर जो अन्य क्षेत्रों में जमीन के आधार पर नौकरी कर रहे हैं उनकी भी ड्यूटी बंद करवा दिया। रहा प्रशासन कि बात प्रशासन पूर्ण सहयोग करता है वर्तमान एस पी ने स्वयं खान का पहले भी निरीक्षण किया है। पहले के उपक्षेत्रीय प्रबंधक कैसे राज्य प्रशासन से तालमेल बनाकर काम करते रहे और अब उपक्षेत्रीय प्रबंधक खान के श्रमिकों को गवाह और साक्ष्यी के तौर पर उलझा रहे है, अपने अधिकारियों को गवाह और साक्ष्यी क्यों नहीं बना रहे है। जबसे यह उपक्षेत्रीय प्रबन्धक खदान में पदस्थ हुए कंपनी को करोडो का आर्थिक क्षति पंहुचा भ्र्ष्टाचार किया। जबकि इनके विरुद्ध कंपनी के उच्चा अधिकारियों और सतर्कता आयोग से शिकायत किया गया कि लाखो रूपये वेतन पाने वाले तीन उच्च स्किल्ड कर्मियों, जिनमे से दो डम्पर ऑपरेटर और एक फिटर अपने बंगले में निजी कार्य हेतु तैनात कर कंपनी का उत्पादन प्रभावित कर करोडो रूपये का नुक्सान कंपनी का किया। आज भी इनके बंगले में एक स्किल्ड कर्मी खदान का कार्य छोड़ तैनात किया गया है। ऐसे भ्र्ष्ट अधिकारी से खदान और ग्रामीणों को न्याय मिलने कि उम्मीद करना व्यर्थ है। प्रबंधन उन असामाजिक तत्त्वों के विरुद्ध एफ आई आर दर्ज करवाए, जो खदान सञ्चालन में बाधा उत्पन्न करते हैं और पुलिस को अपने अधिकारियों से बयान दिलवाकर गवाह बनवाये न कि श्रमिकों को बलि का बकरा बनाये। कोयला मजदूर सभा (एच एम् एस ) संघ राज्य शासन को जिम्मेवार नहीं मानता और ग्रामीणों में से पात्रों को जल्द से जल्द रोजगार दिए जाने का मांग करता है एवं खान के सीधे-साधे श्रमिकों को किसी उलटे सीधे गवाह-साक्ष्यी बनाये जाने कि निंदा करता है।
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