जमुना कोतमा क्षेत्र के सिविल विभाग की लापरवाही से जा सकती है श्रमिक की जान महारत्न कंपनी की कॉलोनियों में गंदगी की भरमार - भालूमाड़ा बना नरक स्थल

जमुना कोतमा क्षेत्र के सिविल विभाग की लापरवाही से जा सकती है श्रमिक की जान 
महारत्न कंपनी की कॉलोनियों में गंदगी की भरमार - भालूमाड़ा बना नरक स्थल 
 
कोल् इण्डिया लिमिटेड कंपनी भारत सरकार की महारत्न कंपनी है। कई लाख नियमित कर्मचारी और लाखों ठेकेदारी श्रमिकों को रोजगार देने वाली भारत की पहली सबसे बड़ी कंपनी है।  प्रतिवर्ष भारत सरकार को कई हजार करोड़ आय और कर देने वाली कंपनी के आवासों और कॉलोनियों का रख-रखाव भ्र्ष्टाचार की बलि चढ़कर दुर्दशा की शिकार है। कोल् इण्डिया सिविल कार्यों के श्रमिक सुविधा के लिए पानी कि तरह फण्ड जारी कर पैसा खर्च करती है।  किन्तु सिविल विभाग के अधिकारी नोचा-नोची खेल के माहिर खिलाडी होते है जिस कारण बन्दर-बाँट कर अपने हितों और अनर्गल आय के स्वार्थ सिद्धि के कारण कंपनी द्वारा जारी धनराशि का सदुपयोग श्रमिक सुविधा केलिए नहीं हो पाता है। इसी कारण महारत्न कंपनी के आवास जर्जर और कॉलोनियों में गंदगी कि भरमार है।  श्रमिक नरक का जीवन जीने को विवश है। जो श्रमिक खून-पसीना एक कर अपने अथक मेहनत से कोल् इण्डिया को बित्तीय वर्ष 2020 -21 में 4626 करोड़ रूपये कुल लाभ दिलवाया है। वही श्रमिक जान जोखिम में डालकर कंपनी आवास में रहता है कि पता नहीं कब आवास का छत टूटकर उनके या परिवार के ऊपर टूटकर गिर जाय। स्वच्छ पेय जल कि आपूर्ति नहीं होती है।  सड़के ऐसी बनती हैं कि बनने के साल भर के भीतर गड्ढों में सड़क खोजना पड़ता हैं। सिविल विभाग क द्वारा एक भी सिविल कार्य ईमानदारी से नहीं किया जाता है। यदि कोयला खदान का एक मजदूर छोटी भी गलती करे तब उसको तुरंत निलंबित कर आरोप-पत्र जारी कर दिया जाता है।  कभी कोई श्रमिक नहीं सुना होगा कि कोई अधिकारी निलंबित हुआ हो या उसके भ्र्ष्ट करतूतों के कारण उसको जल्दी आरोप-पत्र मिला हो। क्योंकि हम्माम में सभी अधिकारी एक जैसे होते है। 
                                              कोतमा गोविंदा उपक्षेत्र के अंतर्गत गोविंदा और भालूमाड़ा दो बड़ी कॉलोनी हैं जिनमे हजारों कि संख्या में श्रमिक आवास है किन्तु जबसे वहां एक कनिष्ठ सिविल इंजीनियर पदस्थ हुआ है दोनों कॉलोनियां और कॉलोनी वासी बजबजाती नालियों, गंदगी और जर्जर आवास के बीच जीवन-यापन करने को विवश है।  क्योंकि क्षेत्र के सिविल स्टाफ अफसर  का सबसे करीबी होने के कारण यह सब- ऑर्डिनटे इंजीनियर न किसी श्रमिक का सुनता न ही किसी अन्य का। जब श्रमिकों ने अपने बदतर आवास और गन्दी की शिकायत कोयला मजदूर सभा /एच एम् एस श्रम-संघ के क्षेत्रीय अध्यक्ष श्री श्रीकांत शुक्ला जी से किया तो उन्होंने संघ की और से अपने पदाधिकारियों एवं कलयाण समिति के सदस्यों के माध्यम से कॉलोनियों का निरिक्षण करवाया तो श्री शुक्ला जी ने पाया कि भालूमाड़ा के वार्ड क्रमांक 09 ,12 ,13 एवं 18  में सबसे जयादा गंदगी और कचरा का जमावड़ा है साथ ही आवासों के छतों के हालत जर्जर है।  भविष्य में यदि कोई दुर्घटना हुई तथा किसी श्रमिक या उसके परिवार के ऊपर छत गिरने से कोई अप्रिय घटना हुई तब सम्पूर्ण जबावदेही वहां पदस्थ सिविल इंजीनियर और स्टाफ अधिकारी सिविल कि होगी। भले मुझे माननीय अदालत कि शरण में जाना पड़े किन्तु मैं किसी भी श्रमिक के साथ अनहित नहीं होने दूंगा। उन्होंने कहा कि सिविल विभाग के स्टाफ अधिकारी यदि पूरे क्षेत्र के कंपनी आवासों कि छतों का सर्वे करवाकर मरम्मत और गंदगी सफाई का कार्य अतिशीघ्र चालू नहीं करवाते हैं तब मैं श्रमिक साथियों के सहयोग से सभी सिविल विभाग के अधिकारीयों कि चल-अचल सम्पति के जांच समस्त संस्थायों को शिकायत कर उनके संपत्ति से लेकर विभागीय जाँच को विवश हो जाऊंगा।

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