अखंड सौभाग्य का व्रत है वट सावित्री:महिलाओ ने उत्साह से की वट वृक्ष की पूजा अर्चना* *अमरकंटक :- श्रवण उपाध्याय*

*अखंड सौभाग्य का व्रत है वट सावित्री:महिलाओ ने उत्साह से की वट वृक्ष की पूजा अर्चना* 
 *अमरकंटक :- श्रवण उपाध्याय* 
          वट सावित्री व्रत जेष्ठ माह की अमावस्या तिथि को किया जाता है । इस वर्ष यह व्रत गुरुवार को महिलाओ द्वारा पूरे विधि विधान से किया गया साथ ही पूजा के दौरान वट सावित्री व्रत के कथा का श्रवण भी किया गया । इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना हेतु वट वृक्ष की पूजा व परिक्रमा करती है । पूजा का मुख्य उद्देश्य अपने पति की लंबी उम्र की कामना व अपने विवाहित जीवन को सुखमय बनाना होता है  । वट सावित्री व्रत सौभाग्य पति के लिए एक बड़ा व्रत माना जाता है जिसे उत्तर भारत की महिलाएं बड़े उत्साह से मनाती है । यह व्रत  कथा राजा अस्वपति की पुत्री सावित्री जिसका विवाह अल्पायु सत्यवान से हुआ तत्पश्चात जब सत्यवान की मृत्यु हो गई तो उसके प्राण यमराज से लेने के लिए सावित्री ने तीन दिन तक कठोर तप किया और अंततः यमराज से अपने पति के प्राणों को वापस प्राप्त कर लिया और  दोनों सुख पूर्वक जीवन यापन करने लगे तभी से इस व्रत का महात्म्य अखण्ड सौभाग्यवती महिलाओ के लिए माना जाने लगा । 
इसी तरह अमरकंटक क्षेत्र में भी महिलाये व्रत रख कर वट वृक्ष का पूजन, परिक्रमा तथा भोग प्रसाद चढ़ाकर अपने अपने पतियों के लिए लंबी उम्र की कामना के साथ वट सावित्री कथा का श्रवण भी किया ।

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