बी एल सिंह
*झोला छाप डॉक्टर ईलाज के नाम पर मरीजों को भ्रमित कर हड़प रहे राशि*
डोला--- एक ओर जहां कोविड-19 जैसी महामारी से पूरा देश जूझ रहा है ठीक इसके विपरीत कोयलांचल क्षेत्र राजनगर में इन दिनों झोलाछाप डॉक्टरों के द्वारा सर्दी जुखाम खांसी में वही पुरानी दवाइयां जैसे पेरासिटामोल या फिर 1/2 सिरप देकर लोगों से अच्छी खासी मोटी रकम वसूल की जा रही है इन झोलाछाप डॉक्टरों के चक्कर में फस कर लोग अपना पैसा व जान दोनों गवा रहे हैं राजनगर के सीआर ओ कलोनी में प्रशासन के द्वारा दिनांक 4 अप्रैल को आदेश जारी कर कंटेन्मेंट जोन क्षेत्र घोषित किया गया।
*क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल*
वही राजनगर में हो रही मौतों का सिलसिला लगातार जारी है पिछले दो-तीन दिनों से रोजाना देखा जाए तो चार से पांच मौतें हो रही हैं और जो लोग स्थानीय झोलाछाप डॉक्टरों का सहारा ले रहे हैं जब स्थिति बेक़ाबू हो जाती हैं तब इसने द्वारा जिला अस्पताल या बाहर ले जाने की सलाह दी जाती हैं तबतक मरीज की हालत गंभीर हो चुकी होती हैं ज्यादातर ऐसे लोगों की ही मौतें हो रही हैं और प्रशासन को शायद इसका पता ही नहीं होता है।
*आखिर ऐसी स्थिति क्यों हो रही निर्मित*
अभी हाल ही में रामनगर थाना अंतर्गत तीन नगर परिषद एवम 10 ग्राम पंचायतें आती हैं जिसमें सबसे बड़ी आबादी वाला क्षेत्र नगर पंचायत बनगवां है जिसे देखते हुए प्रशासन द्वारा राजनगर खेलग्राम में 25.बेड के बिस्तर की व्यवस्था कराई जा रही है और यह तैयारी पूरी भी कर ली गई है जिसका लोगों को बेसब्री से इंतजार भी है लेकिन शायद यह बिस्तर प्रशासन के द्वारा एक दिखावा सा साबित हो रहा है जिसके कारण लगातार क्षेत्र में मौतों का आंकड़ा बढ़ता रहा है लेकिन प्रशासन के द्वारा राजनगर खेलग्राम में 25 बेड का बिस्तर तो तैयार कर लिया गया साथ ही कोरोना जांच की भी बात कह कर तैयारी कराई गई लेकिन यह तैयारी केवल एक दिखावा साबित हो रही है।
*राजनगर में जल्द शुरू किया जाना चाहिए कोरोना जांच की ब्यवस्था*
राजनगर में कोविड-19 जाँच की ब्यवस्था न होने के कारण यहां की जनता को बिजुरी, कोतमा जाना पड़ता है जहाँ आनेजाने में समस्या हो रही हैं जाँच न होने के कारण यह मौतें भी हो रही है अगर प्रशासन के द्वारा खेलग्राम में कोरोना मरीजों की जांच होती तो शायद यहा पर मौतों का आंकड़ा ऐसा नहीं होता या यूं कहें कि सीआरओ कालोनी को जो आज कंटेनर जोन घोषित किया गया यह भी नहीं होता क्योंकि यहां पर अधिकांश मरीज छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ में स्थित आमाखेरवा की ओर प्रस्थान करते हैं लेकिन आमाखेरवा में केवल एसईसीएल कर्मचारियों को ही एडमिट किया जा रहा है प्राइवेट लोगों को नहीं जिसके कारण प्राइवेट मरीज वहां से अपने घर की ओर प्रस्थान कर रहे हैं।
*जनप्रतिनिधि व अन्य संगठन के लोगों ने फेरा मुह*
नगर पंचायत बनगवां राजनगर, डूमरकछार एवं डोला को प्रशासन के द्वारा नगर पंचायत बना दिया गया है लेकिन पंचायतों को नगर पंचायत बना देना और इस महामारी से सामाजिक संगठनों का लुप्त हो जाना यह साफ दर्शाता है कि केवल चाहे वह कांग्रेस के लोग हैं या बीजेपी के लोग हैं या अन्य किसी भी संगठन के लोगों के द्वारा केवल यहां की जनता से वोट की जरूरत होती है तभी तो सभी संगठन जनप्रतिनिधियों ने यहां के स्थानीय लोगों से मुंह फेर लिया है। अब देखना यह है कि क्या प्रसाशन इन झोलाछाप डाक्टरों पर ठोस कार्यवाही करती हैं य नगर की जनता को युही मरता हुआ देखा जाएगा।
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