अनूपपुर जिले में विभिन्न संगठनों के द्वारा विभिन्न स्थानों पर भारत सरकार के 7 साल पूर्ण होने पर काला दिवस मनाया गया*

*अनूपपुर जिले में विभिन्न संगठनों के द्वारा विभिन्न स्थानों पर भारत सरकार के 7 साल पूर्ण होने पर काला दिवस मनाया गया*
संतोष चौरसिया
 जमुना कोतमा अनूपपुर     जब जुल्म और सितम पराकाष्ठा पर पहुंचता है तो जनता करवट लेती है भारत सरकार नरेंद्र दामोदरदास मोदी के प्रधानमंत्री काल में 7 साल पूर्ण कर लिया है। कोई भी ऐसा वर्ग जो इस सरकार से खुश हो नहीं है। हां एक वर्ग भारत सरकार से खासतौर से प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी से प्रसन्न है ।वह है पूंजी पतियों का जमात, मुकेश अंबानी एवं गौतम अदानी का परिवार ।छोटे व्यापारी, फुटकर व्यापारी, लघु  उद्योग चलाने वाले ,बेहाल है बेरोजगारी का आलम यह है कि पिछले 50 वर्ष का रिकॉर्ड टूट गया है। ₹100 लीटर डीजल और पेट्रोल एवं ₹200 लीटर खाने का सरसों तेल यह महंगाई का आलम। इतनी झूठ बोलने वाली सरकार शायद दुनिया में कहीं भी देखी और सुनी नहीं की होगी। covid- 19 जैसे महामारी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका ,आशा कर्मी उषा कर्मी अपनी जान हथेली पर लेकर गांव गांव में वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित करने के लिए ड्यूटी करने जाती थी। अज्ञानता बस कई जगह उन्हें गालियां दी गई ,अपमानित की गई तब भी अपना फर्ज समझ कर ड्यूटी करती थी लेकिन भारत सरकार के इशारे पर मध्य प्रदेश सरकार ने पोषण टेकर आहार एप्स मोबाइल में डालने के लिए जो दबाव बनाया है किसी भी सभ्य समाज के लिए उचित नहीं है ।आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को मंडला जिला ,झाबुआ, डिंडोरी बड़वानी खंडवा अनूपपुर उमरिया, सीधी सिंगरौली शहडोल शिवनी ,बालाघाट आदि आदिवासी बाहुल्य जिलों में जंगलों में जाना पड़ता है ।कहीं मोबाइल नेटवर्क मिलता है और कहीं नहीं मिलता है उन विचारी दस हजार महीने पर काम करने वाले महिलाओं के पास महंगी मोबाइल नहीं है ।उनको तो दो वक्त की रोटी चलाना ही मुश्किल पड़ता है ।छत्तीसगढ़ के माननीय उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश ने छत्तीसगढ़ सरकार से तल्ख टिप्पणी के साथ 2 महीने में जवाब तलब किया है के पोषण ट्रैकर ऐप की क्या आवश्यकता है ।जब कोई एक ही सवाल के लिए एक हाई कोर्ट दिशा निर्देश दिया करता है वह दूसरे सरकारों को विवेकपूर्ण रवैया अख्तियार करते हुए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को तंग करने का दृष्टिकोण छोड़ देना चाहिए ।लेकिन मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी की सरकार बेहद अमानवीय है इससे कुछ भी अच्छी बातें उम्मीद नहीं की जा सकती है ।भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ,एटक सीटू एचएमएस अखिल भारतीय किसान सभा भारतीय महिला फेडरेशन  आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका यूनियन मध्य प्रदेश जिला का इकाई अनूपपुर ने जगह-जगह काला फीता लगाकर काला झंडा लगाकर और यहां तक कि गुस्से में कई महिलाओं ने तो काली साड़ी ही पहन रखी थी। इसी क्रम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका यूनियन मध्य प्रदेश के नेतृत्व में अनूपपुर जिले में कामरेड भूमिया ओग्रे चूकान , कामरेड राधा सिंह पोर्ते दारसागर , कामरेड लीला बांधव बनगवां राजनगर कामरेड उर्मिला पाव डोला, के नेतृत्व में जगह जगह भारत सरकार के विरुद्ध काला दिवस मनाया गया ।वही भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता कामरेड विजय सिंह की अगुवाई में ग्राम मौहरी में काला झंडा लेकर के और भारत सरकार के किसान मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन किया गया कामरेड संतोष केवट जिला सचिव भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की अगुवाई में ग्राम पोड़ी , कामरेड डीप नारायण बर्मा के नेतृत्व में सारंगढ़ कामरेड दीनदयाल केवट के नेतृत्व में देवगांव, अनूपपुर विधानसभा क्षेत्र में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य परिषद सदस्य कामरेड बिजेंद्र सोनी अखिल भारतीय किसान सभा के मध्य प्रदेश के अध्यक्ष कामरेड जनक राठौर कामरेड मोहन राठौर आदि ने अपने अपने घरों से ही काला झंडा एवं काला पट्टी बांधकर भारत सरकार के जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज बदन किया ।भारतीय महिला फेडरेशन ने भारतीय महिला फेडरेशन के उपाध्यक्ष कामरेड निशा मिश्रा के नेतृत्व में काला झंडा एवं काला पट्टी लगाकर किसानों और मजदूरों के साथ एवं भारत सरकार के विरुद्ध एकजुटता का प्रदर्शन किया ।मध्यान भोजन कर्मी संघ के नेत्री राम बाई ने भी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता कामरेड शिव चरण केवट अधिवक्ता एवं  कामरेड सुदामा केवट अधिवक्ता ने भी अपने अपने गांव में विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। समूचे देश की मेहनतकश जनता छात्र नौजवान महिलाएं बुद्धिजीवी छोटे व्यापारी सरकार से बेहद गुस्से में हैं ।पश्चिम बंगाल का चुनाव का परिणाम और दमोह का चुनाव परिणाम साफ इसका जीता जागता सबूत है ।6 महीने से दिल्ली बॉर्डर पर किसान तीन कृषि कानून को रद्द करवाने के लिए बहादुरी से डरते हैं 450 किसानों ने शहादत दी है लेकिन यह निर्लज्ज और झूठों की सरकार किसकी सुनने वाली है। भारत सरकार के गलत नीतियों के कारण एक रिपोर्ट के मुताबिक कोविड-19 से 42 लाख लोगों की जाने गई हैं यूं समझें कि देश का 42 लाख परिवार उजड़ गया भारत सरकार को इसकी चिंता नहीं है भारत सरकार के इशारे पर स्वामी रामदेव ने पूरे देश के चिकित्सकों का मनोबल गिराने के लिए उल्लू जरूर बयान देकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है मालूम होना चाहिए मानवता की रक्षा में 550 डॉक्टरों ने शहादत दी है सैकड़ों नर्सों ने शहादत दी है इसकी चिंता नहीं है ऐसे नासमझ लोगों को बयान देने का प्रोत्साहन कहां से मिलता है सब जानते हैं। और इसीलिए वक्त का तकाजा है की जनता सड़कों पर आए और सरकार को मिट्टी में मिला दे यही एकमात्र रास्ता है लाल झंडा हमेशा से इस रास्ते की पक्षधर रहा है ।भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मध्य प्रदेश के सहायक राज्य सचिव कामरेड हरिद्वार सिंह ने सभी आंदोलनकारियों को धन्यवाद दिया है और आशा किया है कि आने वाले समय में इसी एकजुटता के साथ हम आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे

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